शनिवार, 12 अप्रैल 2014

दहेज़

दहेज का किसने प्रथा बनाई,
किसने इसकी की सुनवाई,
जान हजारों जब खतरे में,
देते ना क्यूँ तुम ठुकराई।

एक ठुकराए जग ठुकराए,
ये तो एक व्योहार बड़ा है,
तुमने माँगा जग ने माँगा,
यह इसके आधार पड़ा है।

कोई कहे ये पुत्र की ख्वाहिश,
इसमें हमरी दखल नहीं है,
अरे मूर्खों क्यूँ नहीं कहते,
भिक्षा दो हम सबल नहीं हैं।

एक ही सुर में अब सब गाओ,
क्रांति दहेज़-मुक्ति की लाओ,
भारत में अब ऐसा नारा,
जन-जन ही दिन रात लगाओ।

"मौर्य" प्रतिज्ञा ऐसी कर लो,
देश-प्रेम कण-कण में भर लो,
भारत का संसार सुखी हो,
प्रीति को ऐसी निर्झर कर दो।
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~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक_________१२/०४/२०१४
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            !!*!!जय हिन्द!!*!!
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बुधवार, 9 अप्रैल 2014

हमें तुम्हारी अमल हुई है

कलम ऐ मेरी कमल बनो अब,
हमें तुम्हारी अमल हुई है।
सभी सुरों को धारण कर लो,
मानवता की कतल हुई है।

हिन्द देश के निर्माणों में,
यहाँ सभी के परिवारों में,
लज्जा के भी दीवारों में,
कैसे कितना दखल हुई है।
सभी सुरों को धारण कर लो,
मानवता की कतल हुई है।

तुम चलना सबके ही आगे,
सदाचार तुम्हरे अनुरागे,
ऐसा ऐटम बम हो जाओ,
हिंसाओं के दल भी काँपे।

दुनियाँ सारा चित्त पड़ा हो,
"मौर्य" तुम्हारा मित्र बड़ा हो,
साथ मेरे तुम जबतक रहना,
ना झुकना इंसाफ बड़ा हो,

पाया तुमको लिखना सीखा,
तुमसे ही मैं पढ़ना सीखा,
बन जाओ अब तोप हमारी,
जानूँ हालत सबल हुई है।
सभी सुरों को धारण कर लो,
मानवता की कतल हुई है।
           APM
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:-०९/०४/२०१४

कलम हमारी तोप से बढ़कर

कलम हमारी तोप से बढ़कर,
कभी नरम तो कभी अकड़कर,
मन की मेरे लिख जाती है,
दुनियाँ में कुछ कह जाती है।

कभी दुखों को ये दर्शाती,
कभी हास्यमय चित्र बनाती,
कभी अँधेरों में भी आकर,
नई सुबह ये दे जाती है।

कभी प्रेम पर लिखती है ये,
कभी घृणा को दर्शाती है,
कभी हिन्द का चित्रण करके,
दुनियाँ को कुछ कह जाती है।

बस एक नहीं इसके बस में है,
दुनियाँ के जो नस-नस में है,
"मौर्य" लिखित में नहीं जो आता,
बातें उसकी कह जाती है।

समाचार भी ये लाती है,
दुराचार भी फैलाती है,
"मौर्य" पढ़े जो जिन नजरों से,
उसको वो सब दे जाती है।

माना की जग कठिन डगर है,
फिर भी इसमें भाव अमर है,
सदियों तक ये रह जाती है,
दुनियाँ में कुछ कह जाती है।
०९/०४/२०१४
              ~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्या ।