गुरुवार, 31 जुलाई 2014

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जो बात कल तक सत्य था वह आज असत्य और कल को तथ्य नहीं हो सकता।
अथवा,
आपने कल तक जिस पर विश्वास किया था, आज उसे कहने अथवा बताने हेतु पुनः चिन्तन कर लेना चाहिए।
~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्या।
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वक्तव्य भौतिक जगत हेतु ही है, इसे अध्यात्मिक जगत से कदापि न जोड़ें।

मंगलवार, 15 जुलाई 2014

इस दुनियाँ में,
जिसमें किसी के आनंदित होने से कोई अंतर नहीं आता, किसी के रोने अथवा दुखी होने से उसमे अंतर अवश्य होता है।

ब्रह्म अथवा ईश्वर या सर्वेश्वर आज केवल इसलिए किसी को नहीं मिलता है क्योंकि सब शूद्र हो गए हैं। ब्रह्म का तादात्म्य ब्राह्मणों के लिए सदा से था, आज भी है और रहेगा भी।
उसकी नीतियाँ अथवा नियम कभी नहीं बदलते क्योंकि उसके उद्योग में कभी हानि ही नहीं हुई।

सत्य वचन

इस जगत में अब केवल एक ही व्यक्ति रहा जिसे जातिगत आँका जा सकता है, और वह भगवान है। वही ब्रह्म भी और वही परमपिता भी।
बाकी सब के सब दूसरी जाति के हैं,

अनमोल वचन

आपदा कभी भी बता के नहीं आती है
और
विपदा सदैव ही सिखा के जाती है।

जब काव्य की सीमा काव्यगत हो और उसमे अपवाद न हों, गुनगुनाने से संगीत स्वयं बजने लगती है।

काव्य को गुनगुनाने मात्र से संगीतों का उदय हो जाता है।

सत्य वचन

गीत-संगीत से बढ़कर संसार में और कोई उपहार नहीं।