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जो बात कल तक सत्य था वह आज असत्य और कल को तथ्य नहीं हो सकता।
अथवा,
आपने कल तक जिस पर विश्वास किया था, आज उसे कहने अथवा बताने हेतु पुनः चिन्तन कर लेना चाहिए।
~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्या।
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वक्तव्य भौतिक जगत हेतु ही है, इसे अध्यात्मिक जगत से कदापि न जोड़ें।
गुरुवार, 31 जुलाई 2014
मंगलवार, 15 जुलाई 2014
सत्य वचन
इस जगत में अब केवल एक ही व्यक्ति रहा जिसे जातिगत आँका जा सकता है, और वह भगवान है। वही ब्रह्म भी और वही परमपिता भी।
बाकी सब के सब दूसरी जाति के हैं,
जब काव्य की सीमा काव्यगत हो और उसमे अपवाद न हों, गुनगुनाने से संगीत स्वयं बजने लगती है।
काव्य को गुनगुनाने मात्र से संगीतों का उदय हो जाता है।
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