दृष्टिकोण जगत
गुरुवार, 2 अप्रैल 2020
कोरोना वायरस और उसके सिद्धांत
शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019
रिश्ते और शर्तें/धर्म
हर एक रिश्ते के अपने अपने शर्त/धर्म होते हैं !
जैसे : पिता और पुत्र, पिता और पुत्री, माता और पुत्र, माता और पुत्री, भाई और बहन, भाई और भाई, पति और पत्नी, चाचा और भतीजा, कंपनी और अधिकारी, सरकार और नागरिक, धूप और प्राणी, समाज और सामाजिक, नदी और तैराक, समुद्र और नाव, ग्राहक और दुकानदार, दशरथ और राम, राम और लक्ष्मण, भक्त और भगवान इत्यादि !
इनमे से कोई भी अगर शर्तों का पालन नहीं करेगा तो रिश्ते या तो कमजोर हो जाएंगे या फिर टूट जाएंगे !
एक तैराक भी अगर चक्रवात में तैरने की कोशिश करेगा तो चकरी उसे डूबा देगी।
कोई अगर जरूरत से ज्यादा धूप में रहेगा तो उसके लिए भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
किसी को कंपनी में नौकरी चाहिए तो उसके अनुरूप डिग्री और अनुभव चाहिए अन्यथा नौकरी नहीं मिल सकती, नौकरी मिलने के बाद भी यदि शर्तों का पालन नहीं करते तो या तो पदोन्नति रुक जाती है या निष्कासित कर दिये जाते हैं।
आप भी अपनी शर्तों/धर्म को निभाएं, खुश रहिये, मस्त रहिये !
दिनाँक : 09/02/2019
अंगिरा प्रसाद मौर्य
बुधवार, 19 अगस्त 2015
जब चार लोगों को एक साथ बलात्कार करने की शिक्षा दी जाती है तब किसी का विरोध क्यों नहीं आता
मैं माननीय मुलायम सिंह जी का समर्थन करता हूँ !
उन्होंने जो भी कहा सही कहा और अच्छी बात कही !
हमारी केंद्र सरकार ने फ़िल्म वालों को छूट दे रखी है बलात्कार जैसे वातावरण बनाने के लिए।
हमारे लोगों ने पॉर्न साइट्स बंद करने का भी विरोध किया, यहाँ तक कि इस विरोध में मीडिया कलाकार भी शामिल हैं। बहुधा पॉर्न वीडियो में सामूहिक बलात्कार की ही शिक्षा दी जाती है।
हमारे देश की महिलाएँ अंगप्रदर्शन का केंद्र बन चुकी हैं। महिलाओं का मानना है कि वे दिखेंगी नहीं तो बिकेंगी कैसे !
महिलाएँ जब अपने यौवन का प्रदर्शन इस प्रकार करेंगी तो स्वभाविक है उनके अनेक ग्राहक होंगे !
मुझे तो आज के मीडिया का श्री मुलायम सिंह जी पर विधवा विलाप मात्र बनावटी नजर आ रहा है।
जब महिलाएं रेप के लिए प्रोत्साहित करेंगी तो क्या पुरुष पीड़ित नहीं होते ?
सब लोग महिलाओं पर प्रताड़ना की बात करते है। कोई पुरषों पर प्रताड़ना का विरोध क्यों नहीं करता ?
इसलिए मैं श्री मुलायम सिंह यादव जी को अपना आदर्श मान लिया आजसे ।
शनिवार, 13 जून 2015
पंडित जी
एक बार एक पंडित जी कथा कह रहे थे !
जब कथा समाप्त हुआ तब उन्होंने चरणामृत वितरित करते का आदेश दिया !
वितरक ने अपने हाथ में लोटा-चम्मच लिया और पहले पंडित जी को ही देने लगा !
पंडित जी ने लेने से मना कर दिया !
प्रार्थना करने पर पंडित जी ने कहा कि ये हमारे लिए नहीं है। हम इसे कभी नहीं ग्रहण करते ।
वितरक बहुत ही हठी था ।
उसने पूरा चरणामृत पंडित जी को ही पिलाने के लिए ठान लिया।
यह सब देख पंडित जी वहाँ से नौ दो ग्यारह होने पर विचार कर लिया।
इतने में पंडित जी को चार नवयुवकों ने पकड़ लिया और वहीँ पर सुला दिया।
तद्पश्चात हठी युवक एक व्यक्ति से बछड़ों को दवा पिलाने वाला ढरका मंगवाया !
अब चार युवक पंडित जी को जकड़े हुए थे !
एक युवक ने जबरन पंडित जी का मुह खोला और तब हठी युवक ने ढरके से पंडित जी को पूरा चरणामृत पिला डाला ।
उसके बाद से पंडित जी से कथा कहने हेतु कोई बुलाता है तो पंडित जी बिना कहे चरणामृत मांग कर पी लेते हैं।
रविवार, 10 मई 2015
अर्थ बताओ
आपसे यदि कोई
1 Ambulance,
2 mobile,
3 tube light
4 simcard का हिन्दी पूँछे तो तुरंत बताना !
1 रोगी वाहन
2 अस्थिर
3 प्रकाशनली
4 संचारण कुँजी
शनिवार, 2 मई 2015
जीव पर उपकार कर
आज कहीं पर फसल को हानि हो रही है तो कहीं पर भूकम्प आ जा रहा है, कहीं लोग आत्महत्या कर रहे हैं तो कहीं भूखो मर रहे हैं तो कोई आपदा से मर रहे हैं। परंतु ईश्वर नहीं आता !
आखिर क्यूँ ????
कारण क्या है ?????
आखिर ईश्वर आये ही क्यूँ !!!!! कौन उसे बुलाना चाहता है !!!!! ईश्वर इतना सामर्थ्यवान है कि वह बिना आये भी सबका संहार कर सकता है।
आज इतनी घृणा है इतनी कटुताएँ हैं मानो मानवता जैसी कोई प्रवृत्ति ही नहीं होती ! ऐसे में ईश्वर से कौन स्नेह करने वाला है!!! ईश्वर का सत्कार कौन करने वाला है। आजकल तो लोग अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने हेतु ईश्वर का नाम लेते हैं। लोग तो केवल दिखाने के ईश्वर की स्तुति करते हैं ।
कोई भी सुखी संसार हेतु ईश्वर से कुछ मांगने वाला नहीं है। सब अपने-अपने स्वार्थों को साधने में लगे हैं। ऐसे में ईश्वर किसके लिए आएगा ???? ईश्वर का तो पूरा संसार है।
आपके समक्ष प्रस्तुत हैं इसी सन्दर्भ में हमारी कुछ काव्यगत पंक्तियाँ :-
संस्कार अब अपंग है !
सत्कार अब छिन गए!
अवतार है रुका हुआ !
करतार है छुपा हुआ !
दिन में न प्रकाश है,
न रात में विश्राम है।
धुंध सा आभास है,
विलाप है संग्राम है।
न वृक्ष का संहार कर,
न पक्षियों पे वार कर।
जंतु से जगत बना,
स्नेह तूँ अपार कर।
जीव पे उपकार कर,
तूँ बड़ा व्यापार कर।
अविनाशी तूँ धन जुटा,
आपदा से मार कर।
धर्म परोपकार है,
न धर्म का विनाश कर।
करतार क्यूँ ही आएगा!
अधर्म का प्रकाश कर!
लूट ले विश्वास को तूँ,
कपट का श्रृंगार कर ले,
कंश की भरमार होगी!
तूँ धरा पे राज कर ले !
देख उसकी गर्जना से,
काँप उठती है धरा !
एक जो प्रहार कर दे,
परिणाम में ये जग मरा।
अहम् में तो जग मुआ,
खोद न तूँ अब कुँआ !
"मौर्य" डर तूँ ईश को,
साध ले मनीष को।
~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्य
दिनाँक : 02/05/2015
सभी मानवों से हमारी यही विनती है कि आप ईश्वर से जब भी कुछ माँगना चाहें तो इस प्रकार विनती करें !
"हे ईश्वर ! हे परमेश्वर !
हमसे जाने-अन्जाने जो भी अपराध हुए हैं उसे क्षमा कर दो प्रभु !
हे महेश ! हे वृजेश !
हमें सद्ज्ञान दो प्रभू !
हमें सद्बुद्धि दो प्रभु !
हमारा मार्गदर्शन करो प्रभु !"
क्योंकि,
"बिन मांगे मोती मिले, मांगे मिले न भीख"
अर्थात्- यदि आप प्रत्यक्ष इच्छा नहीं व्यक्त करते हो तो ईश्वर आपको आपने अनुसार वो सबकुछ देगा जिससे आपका जीवन सुचारू रूप से चलता रहेगा और विश्व का भी कल्याण होगा।
जय श्री कृष्ण!
जय हिन्द !