शनिवार, 13 जून 2015

पंडित जी

एक बार एक पंडित जी कथा कह रहे थे !

जब कथा समाप्त हुआ तब उन्होंने चरणामृत वितरित करते का आदेश दिया !

वितरक ने अपने हाथ में लोटा-चम्मच लिया और पहले पंडित जी को ही देने लगा !

पंडित जी ने लेने से मना कर दिया !

प्रार्थना करने पर पंडित जी ने कहा कि ये हमारे लिए नहीं है। हम इसे कभी नहीं ग्रहण करते ।

वितरक बहुत ही हठी था ।

उसने पूरा चरणामृत पंडित जी को ही पिलाने के लिए ठान लिया।

यह सब देख पंडित जी वहाँ से नौ दो ग्यारह होने पर विचार कर लिया।

इतने में पंडित जी को चार नवयुवकों ने पकड़ लिया और वहीँ पर सुला दिया।

तद्पश्चात हठी युवक एक व्यक्ति से बछड़ों को दवा पिलाने वाला ढरका मंगवाया !

अब चार युवक पंडित जी को जकड़े हुए थे !
एक युवक ने जबरन पंडित जी का मुह खोला और तब हठी युवक ने ढरके से पंडित जी को पूरा चरणामृत पिला डाला ।

उसके बाद से पंडित जी से कथा कहने हेतु कोई बुलाता है तो पंडित जी बिना कहे चरणामृत मांग कर पी लेते हैं।

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