ब्रह्म अथवा ईश्वर या सर्वेश्वर आज केवल इसलिए किसी को नहीं मिलता है क्योंकि सब शूद्र हो गए हैं। ब्रह्म का तादात्म्य ब्राह्मणों के लिए सदा से था, आज भी है और रहेगा भी।
उसकी नीतियाँ अथवा नियम कभी नहीं बदलते क्योंकि उसके उद्योग में कभी हानि ही नहीं हुई।
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