जो प्रेम करते हैं वो आरोप नहीं लगाते,
और जो आरोप जानते हैं वे प्रेम नहीं जानते।
बेवफाई का आरोप लगाने वाले अंधे प्रेम के शिकार होते हैं। अंधा यानी अँधूरा प्रेम! अँधूरा अर्थात् जहाँ पर एक पहलू प्रेम करता है और दूसरा नहीं। पहला पहलू दूसरे को लुभाना चाहता है कि वो भी प्रेम कर ले।
किन्तु पहले पहलू को इसपर इतनी भी मेहनत नहीं करनी चाहिए कि बाद में स्वयं में ही टूट जाना पड़े, आरोपों का ग्रन्थ गढ़ने पर मजबूर हो जाए।
वास्तव में जो बेवफा बेवफा चिल्लाते हैं ये कपटी होते हैं। जब इनका कपट सफल नहीं होता तो ये पात्र को बेवफा बता देते हैं।
ऐसे लोग या तो किसी लालच वस प्रेम करते हैं या फिर छुपकर।
छुपकर के कभी प्रेम नहीं किया जाता। वह प्रेम नहीं चोरी है।
प्रेम सम्बन्ध में पारदर्शिता होनी चाहिए।
सबको ज्ञात होना चाहिए कि ये लोग प्रेम करते हैं।
फिर चाहे कोई सहमत हो अथवा असहमत। लोगों की सहमति में नहीं ! एक-दूसरे की सहमति में प्रेम निहित होता है।
प्रेम इस संसार में सबसे निर्मल है। अपने प्रेम को सार्थक करने हेतु किसी से लड़ जाना, पाप नहीं पूण्य है ! अधर्म नहीं धर्म है।
किन्तु दुर्भाग्य तो यह है कि हम प्रेम-ज्ञान आजकल फ़िल्मी दुनियाँ से सीखते हैं, जिसमे मात्र चोरी सिखाई जाती है, कपट बताया जाता है। पुरुषों को लुभाने के लिए नारियों को सार्वजनिक स्तर पर नग्न होना सिखया जाता है।
ये सबकुछ मात्र व्यापार और अपने हवस की पूर्ति हेतु समाज के साथ छल है। फिल्मों में प्रेम नहीं कपट बताया जाता है। वेश्यावृत्ति सिखाई जाती है।
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