अहंकार वह कड़वा तत्व है जिसके पूर्ण प्रबल होने पर व्यक्ति को दुर्गति का सामना करना पड़ता है, और यदि यही अहंकार सीमित हो तो हमारे वचन की रक्षा करता है, हमें मर्यादित बना देता है। @angiraprasad स्व ज्ञानार्जन से,
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