अपने अन्दर दम भरना है, नहीं हौंसला कम करना है,
लक्ष्य हिमालय की चोटी हो, आगे उसके ना डिगना है।
उपकार गैर का बेमतलब है,
उपकार में अपनी ना धुनना है,
उपहार शैर आराम के लायक,
वो नहीं सुनो जो ना सुनना है।
हृदय की पीड़ा सुनते जाओ
मन को अपने ना बहकाओ,
कमल-लक्ष्य तुम रखलो मनमे,
कीचड़ में तुमको खिलना है।
लक्ष्य में अपने ही चलना है,
फूल है काँटों में चुनना है,
"मौर्य" तथ्य ना कभी भुलाना,
फूल तो काँटों में खिलना है।
आज तुम्हारे पास नहीं कुछ,
आता तुमको रास नहीं कुछ,
कर्म सहारे सब आता है,
कर्म-अवज्ञा ना करना है।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:-१२/०३/२०१४
~~~~~~~~~APM
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यहाँ पर एक "कर्म" का तात्पर्य कर्तव्य से है। इन दोनों में से आप किसी का भी चुनाव कर सकते है।
>>>>>>>जय श्री कृष्ण<<<<<<<
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