गुरुवार, 13 मार्च 2014

एक वृक्ष हमारा भी उपवन में

अरमान यही है अपने मन में, मैं सिद्ध हमेशा रहूँ गगन में,
सम्मान की आशा हमें नहीं है, एक वृक्ष हमारा भी उपवन में।

सबको शीतल छाया दे दूँ,
कुछ को अपनी काया दे दूँ,
हर जीव यहाँ पर मुस्काए बस,
खड़ा रहूँ मैं भले तपन में।

कुछ लोगों की भूख मिटाऊँ,
हर दिन उन्हें याद मैं आऊँ,
उपहार बनूँ मैं यहाँ अनूठा,
ऐसी आभा भर लूँ तन में।

"मौर्य" यहाँ क्या याद करेंगे,
ओ बस मेरी फरियाद करेंगे,
जिसको मेरा प्यार मिला हो,
कल्पना उनकी रहूँ चमन में।
एक वृक्ष हमारा भी उपवन में।।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:-१३/०३/२०१४
~~~~~~~~~APM

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