शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

सरस्वती वंदना

गुणगान करें, सम्मान करें !
जगवासी नित अभिमान करें !
समहित सत्य सदा कर दे !
हिय में स्वर भर दे !
माँ ऐसा ही वर दे !

हम पुत्र बनें, हम इत्र बनें !
हम श्रेष्ठ रहें, जग-मित्र बनें !
हम श्रमिक बनें, स्वामित्व ठने !
कलह निवारण पर्ण कर दे !
हिय में स्वर भर दे !
माँ ऐसा ही वर दे !

एकचित्त बनें, चहुँओर रहें !
हम नृत्य करें तो मोर रहें !
यथा-व्यथा, जग शोर रहे !
सब विद्याएँ तर कर दे !
हिय में स्वर भर दे!
माँ ऐसा ही वर दे !
   ~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्या ।
कृति पूर्णता की ओर अभी अग्रसर !

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