सोमवार, 1 दिसंबर 2014

भाग्य एवम् लक्ष्य

जय श्री श्याम।।सादर प्रणाम।।
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भाग्य तो अवश्य ही साथ में सबके होता है किन्तु , समय भी निर्धारित होता है। ईश्वर के कार्य में देर हो सकता है पर अंधेर नहीं।
जैसे :- किसी गाव में जमीन की सतह से पानी की सतह यदि बहुत नीचे हो तो कोई व्यक्ति एक जगह कुँआ खोदते परेशान होकर दूसरी जगह खोदता है और फिर दूसरे से तीसरे जगह किन्तु वह परेशान ही रहता है पर पानी की सतह तक नहीँ पहुँच पाता है। जबकि जो व्यक्ति धैर्य के साथ दृढ़ होकर एक ही कुँआ खोदता है वह पानी की सतह तक पहुँच जाता है।
अतः अपना प्रयास जारी रखो जितना कर सकते हो करो परंतु धीरज रखो क्योंकि आपने चाहे जैसा भी मार्ग पकड़ा है वो आपकी दृष्टि में कल भी सही था और कल भी सही होगा।
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