कठोर परिस्थितियों में सत्य कहना बहुत कठोर होता है, किन्तु वाणी की मधुरता हेतु झूठ बोलना अथवा सत्य को दबाना महापाप अर्थात आत्महत्या के समान है।
कभी ऐसी परिस्थिति में यदि आप पड़ जाएँ और आपको दृढ़ विश्वास हो कि यहाँ पर सत्य कहना अनुचित है तो वचनमुक्त हो जाएँ। अर्थात मूक अथवा चुप रहें किन्तु कलह निवारण हेतु झूठ न बोलें अन्यथा आप महाकलह को न्योता दे बैठेंगे।
किसी की जान बचाने हेतु ही झूठ की अनुमति है और वह भी जिसका व्यक्तित्व मानवीय हो केवल उसके लिए ही।
जय श्री कृष्ण !
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